फर्जी कास्टिंग एजेंसी के नाम पर नौकरी का झांसा देकर ऐंठे लाखों रुपये, आरोपी महिला बनकर करता था चैट
राजस्थान। कोटा पुलिस ने साइबर ठगी के मास्टरमाइंड दीपक मीणा को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। आरोपी ने देशभर में करीब 300 युवतियों को काम दिलाने का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया। सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर वह महिला बनकर युवतियों से बातचीत करता था और उनसे रुपये ऐंठता था। पुलिस ने उसे फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले उसके साथी भोला को भी दबोचा है।
साइबर थाना इंचार्ज सतीशचंद्र के अनुसार दीपक मीणा कोटा जिले के झाड़ गांव का रहने वाला है। उसके पिता हंसराज मीणा सरकारी शिक्षक हैं। दीपक ने भरतपुर के एक निजी कॉलेज से बीटेक करने के बाद मुंबई में अप्रेंटिसशिप की। वहीं, उसने विभिन्न प्रोडक्शन हाउस में असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम किया, जहां से उसे लोगों को झांसे में लेने की चालें सीखने का मौका मिला।
पुलिस जांच में सामने आया कि दीपक ने “व्हाइट स्टूडियो कास्टिंग” और “2000 कास्टिंग कंपनी” नाम से सोशल मीडिया पर दो फर्जी अकाउंट बनाए थे। इन अकाउंट्स के जरिए वह युवतियों को मॉडलिंग या अभिनय के रोल दिलाने का झांसा देकर पैसे ऐंठता था। 2023 में मुंबई छोड़कर जयपुर आने के बाद उसने “नंदिनी श्रीकेट” और “यश नगरकोटी” के नाम से फर्जी व्हाट्सएप बिजनेस अकाउंट बनाए और ठगी का सिलसिला जारी रखा।
पुलिस के अनुसार, दीपक पहले भी एक युवती को भगाने और दुष्कर्म के मामले में जेल जा चुका है। रिहा होने के बाद उसने ठगी का नेटवर्क खड़ा किया।
जांच में यह भी पता चला कि दीपक ने कोटा के भोला नामक व्यक्ति से संपर्क कर अलग-अलग नामों पर सिम कार्ड निकलवाने के लिए उसे पैसे दिए। शराब का आदी भोला अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी सिम जारी कराता था। वहीं, ठगी से मिली रकम दीपक सीधे अपने खाते में नहीं डालता था, बल्कि ई-मित्र संचालकों के खातों में ट्रांसफर करवाकर नकद निकालता था।
फिलहाल पुलिस ने इस फर्जी कास्टिंग डायरेक्टर और उसके साथी भोला दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।







