नोएडा। नोएडा में मॉल के बेसमेंट निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बढ़ते जनआक्रोश के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को पद से हटा दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
एसआईटी ने जांच का जिम्मा संभालते हुए नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से जानकारी जुटाई। करीब दो घंटे तक दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। जांच दल को पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विजटाउन परियोजना के मालिक बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
एडीजी मेरठ जोन करेंगे एसआईटी का नेतृत्व
एसआईटी की कमान मेरठ जोन के एडीजी को सौंपी गई है। टीम में मेरठ मंडलायुक्त और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। जांच दल को हादसे के वास्तविक कारणों, संबंधित विभागों और एजेंसियों की भूमिका, लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने के निर्देश दिए गए हैं।
हादसे ने उजागर की प्रशासनिक खामियां
यह दर्दनाक घटना ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 क्षेत्र में उस समय हुई, जब भारी जलभराव के बीच सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार पानी से भरे गड्ढे या अंडरपास में फंस गई। कार समेत युवक के डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद जलनिकासी व्यवस्था, निर्माण कार्यों की निगरानी और चेतावनी संकेतों की कमी को लेकर स्थानीय प्रशासन और विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
जलनिकासी से लेकर आपात व्यवस्था तक होगी जांच
एसआईटी क्षेत्र की जलनिकासी प्रणाली, सड़क और अंडरपास निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों के पालन, चेतावनी बोर्डों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की भी विस्तृत जांच करेगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार उनके फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भरा पाया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि वह लंबे समय तक पानी में फंसे रहे। डॉक्टरों ने बताया कि पानी भरने से ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक गई, जिससे दम घुटने की स्थिति बनी और अत्यधिक दबाव के कारण हार्ट फेलियर हुआ, जो मौत का तत्काल कारण बना।
पांच दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी
मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है और सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि घटना किन परिस्थितियों में और किन कारणों से हुई, इसकी पूरी पड़ताल कर पांच दिन के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।







