मृतका के परिजनों ने भी नहीं ठहराया विधायक को जिम्मेदार, कोर्ट ने सबूतों के आधार पर सुनाया फैसला
भदोही। एक नाबालिग घरेलू सहायिका की रहस्यमयी मौत के मामले में फंसे समाजवादी पार्टी के विधायक जाहिद बेग को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि विधायक ने पीड़िता को आत्महत्या के लिए मजबूर किया या किसी साजिश में शामिल थे। मामले में कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है।
मामला सितंबर 2024 का है, जब एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इस मामले में 14 सितंबर को स्थानीय पुलिस ने विधायक और उनकी पत्नी सीमा बेग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पीड़िता के साथ काम करने वाली एक अन्य किशोरी ने पुलिस को बताया था कि घर में उन्हें डांट-फटकार के साथ कभी-कभी मारपीट का भी सामना करना पड़ता था, जिससे मृतका तनाव में थी और काम छोड़ना चाहती थी।
विधायक की ओर से दाखिल जमानत याचिका में यह दलील दी गई कि मृतका एक युवक से संपर्क में थी, जो उसे उसकी कुछ तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल कर रहा था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी पता चला कि घटना से पहले मृतका ने उसी युवक से बात की थी।
सरकारी वकील एफआईआर दर्ज करने में हुई पांच दिनों की देरी का स्पष्ट कारण अदालत को नहीं बता सके। वहीं, मृतका के माता-पिता ने अपने बयान में विधायक को सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया। चूंकि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया गया है, ऐसे में अदालत ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को खारिज करते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली।
अब विधायक जाहिद बेग को एक निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ रिहा होने की अनुमति दी गई है।







