नई दिल्ली- दिल्ली के उत्तरी जिले में साइबर अपराध शाखा ने एक संगठित ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसे कोई बाहरी गिरोह नहीं बल्कि एक ही परिवार मिलकर संचालित कर रहा था। आरोपी खुद को लोन और इंश्योरेंस सेवा प्रदाता बताकर लोगों को झांसे में लेते और उनसे पैसे वसूलते थे।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का संचालन एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने बेटों और बेटी के साथ मिलकर कर रहा था। साइबर थाने की टीम ने कार्रवाई करते हुए परिवार के पांच सदस्यों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि ये लोग आसान लोन, कम ब्याज दर और बिना झंझट की प्रक्रिया का लालच देकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर रकम ऐंठते थे।
मामले का खुलासा सदर बाजार निवासी एक युवक की शिकायत के बाद हुआ, जिसने बताया कि उसे व्हाट्सएप के जरिए लोन दिलाने का ऑफर दिया गया था। शुरुआत में मामूली रकम ली गई और बाद में अलग-अलग कारण बताकर उससे लगातार पैसे ट्रांसफर कराए गए। जब लोन की राशि खाते में नहीं पहुंची, तब उसे ठगी का एहसास हुआ।
जांच के दौरान पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और तकनीकी निगरानी के जरिए सुराग जुटाए। इसके आधार पर संगम विहार इलाके में छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर का पता लगाया गया। पुलिस को मौके से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, लैंडलाइन फोन और अन्य दस्तावेज मिले हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं तथा कितने लोगों को अब तक ठगा जा चुका है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।







