लुधियाना। नाबालिग छात्र के अपहरण, फिरौती और हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। लुधियाना की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने गांव मलाक निवासी गुरवीर सिंह उर्फ गैवी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए कठोर दंड दिया, हालांकि इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी में न मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार किया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह बाजवा ने अपने फैसले में आरोपी पर कुल 4.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही पीड़ित परिवार को 3 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी, जबकि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अदालत का पक्ष
अदालत ने कहा कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य और डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है। आरोपी की उम्र, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सुधार की संभावना को देखते हुए आजीवन कारावास को उपयुक्त सजा माना गया। अदालत के अनुसार, कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि न्याय और सुधार के बीच संतुलन बनाए रखना भी है।
कैसे सामने आया मामला
यह मामला 30 जून 2019 का है, जब गांव मलाक निवासी किसान हरदीप सिंह उर्फ काली पंच का 15 वर्षीय बेटा अनमोलप्रीत सिंह शाम को घर से खेलने निकला और वापस नहीं लौटा। देर रात तलाश के दौरान परिजनों को एक व्हॉट्सऐप मैसेज मिला, जिसमें 20 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई थी और पुलिस को सूचना देने पर बच्चे की हत्या की धमकी दी गई थी। यह संदेश एक विदेशी व्हॉट्सऐप बिजनेस नंबर से भेजा गया था।
जांच में हुए अहम खुलासे
1 जुलाई 2019 को थाना सदर जगराओं में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि घटना वाले दिन आरोपी गुरवीर सिंह अनमोलप्रीत को अपने साथ कैफे ले गया था और बाद में उसे सफेद ज़ेन कार में बैठाकर ले गया। कई गवाहों ने अदालत में बयान दिया कि उन्होंने बच्चे को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा था, जिसे अदालत ने “लास्ट सीन एविडेंस” के रूप में स्वीकार किया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने 3 जुलाई 2019 को आरोपी को उसी सफेद ज़ेन कार के साथ गिरफ्तार किया। वाहन से बच्चे की चप्पलें, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर अखाड़ा ग्रिड नहर के पास से झाड़ियों में अनमोलप्रीत का शव बरामद किया गया, जिसकी पहचान परिजनों ने की।
डिजिटल सबूत बने निर्णायक
साइबर फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई कि फिरौती का व्हॉट्सऐप मैसेज आरोपी के मोबाइल नंबर से ही भेजा गया था। इसी डिजिटल साक्ष्य ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत किया और आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम कड़ी जोड़ी।
अभियोजन पक्ष की दलील
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह पेश किए। अदालत ने सभी गवाहियों और तकनीकी साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को अपहरण, फिरौती और हत्या का दोषी ठहराया।







