बिहार। वैशाली जिले के हाजीपुर जंक्शन पर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां प्लेटफॉर्म पर सो रहे एक दंपत्ति का डेढ़ साल का बेटा रात के अंधेरे में चोरी कर लिया गया। सुबह बच्चे के गायब होने की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और जीआरपी ने तुरंत जांच शुरू कर दी। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप है।
घटना 3 दिसंबर की रात की बताई जा रही है। परिवार हाजीपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर सोया हुआ था। 4 दिसंबर की सुबह लगभग 6 बजे माता-पिता की नींद खुली तो तीन बच्चों में से एक—मोहम्मद फहीम उर्फ राजा बाबू—बिस्तर से गायब मिला। तत्काल परिजन पुलिस के पास पहुंचे और बच्चे के अपहरण की पुष्टि के साथ ही छानबीन का सिलसिला शुरू हुआ।
सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एक महिला और एक पुरुष बच्चे को उठाकर ले जाते हुए नजर आए। पहचान होने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान बिदुपुर थाना क्षेत्र के अर्जुन कुमार और हाजीपुर की किरण देवी के रूप में हुई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि छह लोगों का संगठित गिरोह है, जो बच्चे को चुराकर बेचने की योजना में शामिल था।
मुख्य आरोपियों ने बताया कि बच्चा चोरी कर बिदुपुर निवासी सोनू को सौंपा गया, जो इस काम में बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सोनू को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने चौंकाने वाली जानकारी दी—बच्चे को 3.50 लाख रुपये में बेचा गया है और सौदा कराने में एक डॉक्टर की प्रमुख भूमिका रही।
सोनू ने बताया कि समस्तीपुर के शाहपुर पटोरी निवासी डॉक्टर अविनाश कुमार और उनकी सहयोगी मुन्नी कुमारी ने बच्चे की खरीद-फरोख्त की पूरी डील तय करवाई थी। बच्चा डॉक्टर अविनाश और मुन्नी को सौंप दिया गया, जिसके बदले में सोनू को 1.30 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया।
पुलिस ने छापेमारी कर इस मामले में शामिल छह आरोपियों—अनिल कुमार साह, गुड़िया देवी, मुन्नी कुमारी, अर्जुन कुमार, सोनू कुमार और किरण देवी—को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि इस पूरे कांड का मुख्य साज़िशकर्ता माना जा रहा डॉक्टर अविनाश अब भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीम लगी हुई है।







