देहरादून: उत्तराखंड पुलिस की विशेष टास्क फोर्स (STF) ने नकली दवाओं की भारी मात्रा में उत्पादन और वितरण करने वाले संगठित गिरोह पर शिकंजा कसा है। इस गिरोह के अब तक 12 सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें से हाल ही में पति-पत्नी की जोड़ी को जिरकपुर (पंजाब) से पकड़ा गया है।
नकली दवाओं का जाल
गिरोह की पहचान “एपी मेडिकोज” के नाम से की गई है, जो पानीपत स्थित एक फर्म है। यह गिरोह उत्तराखंड समेत छह अन्य राज्यों को नकली ब्रांडेड जीवनरक्षक दवाएं सप्लाई करता रहा है। पुलिस ने बताया कि ऐसे गिरोह का पता लगाना और अदालत में संज्ञानात्मक कार्रवाई करना एक बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था।
STF ने दिए कड़े निर्देश और चलाया अभियान
पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ ने STF को इस गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद हासिस्ट (SSP STF) नवनीत सिंह भुल्लर ने अपनी टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नकली दवाओं का व्यापार करने वालों की पहचान कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पहले की गिरफ्तारी और दस्तावेज़ों का मिलान
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1 जून 2025 को STF ने संतोष कुमार को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से बड़े पैमाने पर नकली रैपर, लेबल और QR कोड बरामद हुआ थे।
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इसके बाद गिरोह के किंगपिन नवीन बंसल और आदित्य काला को भी गिरफ्तार किया गया था।
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18 जुलाई 2025 को देवी दयाल गुप्ता (Dr Mittal Laboratories के मालिक) को देहरादून से गिरफ्तार किया गया। उसके अवैध कारखाने में लाखों गोलियां और कैप्सूल नकली ब्रांड से मेल खाते पैकेजिंग में पाए गए
नकली दवाओं का जाल—साज़िश, निर्माण और सप्लाई चैन
गिरफ्तार अभियुक्तों ने अपने नेटवर्क के बारे में बताया कि नवीन बंसल और प्रदीप कुमार ने मिलकर सांई फार्मा फर्म नाम से नकली दवाएं तैयार करनी शुरू की। वे नकली रैपर और बॉक्स देहरादून से बनवाकर राजस्थान भेजते थे, जबकि फॉयल पैकेजिंग हिमाचल प्रदेश से आती थी।
इसके बाद ये दवाएं विभिन्न राज्यों में ब्लिस्टर पैक कर, कानूनी कम्पनी के नाम पर सप्लाई की जाती थीं। पानीपत में संचालित “एपी मेडिकोज” और देहरादून में चल रहे मेडिकल स्टोर्स को भी इस गिरोह से जोड़ा गया था।
इसके अतिरिक्त, करोनाकाल में रेमेडिसिविर इंजेक्शन्स की नकली बिक्री के मामले में प्रदीप कुमार पहले भी जेल जा चुका था, और उनकी फर्म से पिछले दो वर्षों में लगभग ₹14 करोड़ का लेन-देन हुआ है
निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई
इस अफरातफरी से पता चलता है कि नकली जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण और बिक्री देशव्यापी समस्या बन चुका है, जिसका बहुत ही गंभीर प्रभाव जनस्वास्थ्य पर पड़ता है। STF ने मामला दर्ज कर सभी पकड़े गए अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज़ कर दी है, और आगे भी गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान हेतु जांच जारी है।







