देहरादून। उत्तराखंड में गैंगस्टर और अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत एसटीएफ को बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसटीएफ ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस के जरिए अवैध हथियार रखने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से एक अवैध पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किया गया है।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशों पर पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन और पुलिस उपाधीक्षक आर.बी. चमोला के पर्यवेक्षण में गठित एसटीएफ टीम ने यह गिरफ्तारी की।
फर्जी लाइसेंस के जरिए हथियार रखने का खुलासा
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बाहरी राज्यों से कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उत्तराखंड की शस्त्र पंजिका में उन्हें दर्ज करा रहे हैं। सूचना की पुष्टि के लिए एसटीएफ ने देहरादून, मेरठ और सिरसा के जिलाधिकारी कार्यालयों से पत्राचार कर जांच की। जांच में सामने आया कि शस्त्र लाइसेंस नंबर 3805 पहले सिरसा से मेरठ और फिर वर्ष 2020 में देहरादून स्थानांतरित दिखाया गया था, जबकि सिरसा जिलाधिकारी कार्यालय से यह लाइसेंस कभी जारी ही नहीं हुआ था।
केहरी गांव से आरोपी गिरफ्तार
जांच के आधार पर एसटीएफ टीम ने सुरागरसी करते हुए 15 जनवरी 2026 को थाना प्रेमनगर क्षेत्र के केहरी गांव से आरोपी मनोज पुत्र भोपाल सिंह को गिरफ्तार किया। आरोपी मूल रूप से शामली (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है और वर्तमान में देहरादून में रह रहा था। आरोपी के खिलाफ थाना प्रेमनगर में मुकदमा संख्या 09/2026 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आर्म्स एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी एसटीएफ
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उत्तराखंड के कई जिलों में बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर दर्ज कराए गए हैं। एसटीएफ अब आरोपी से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी लाइसेंस के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई कर रही है।
पहले से दर्ज हैं कई आपराधिक मामले
पुलिस के अनुसार, आरोपी मनोज के खिलाफ पहले से देहरादून में धोखाधड़ी, बलवा और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। अन्य राज्यों और जिलों से भी उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
बरामदगी का विवरण
एक अवैध सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल (.30 बोर)
पांच जिंदा कारतूस
एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस
इस कार्रवाई को एसटीएफ की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, जिससे राज्य में अवैध हथियारों और फर्जी लाइसेंस के नेटवर्क पर कड़ा प्रहार हुआ है।







