राज्य बाल आयोग ने पाया—न स्कूल की मान्यता, न हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था
देहरादून। कारगी चौक क्षेत्र में एक प्राइवेट प्री-प्रेपरेटरी स्कूल और उससे जुड़े हॉस्टल में दो मानसिक रूप से असमर्थ बच्चों के यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। बच्चों की मां द्वारा दी गई शिकायत के बाद यह मामला उजागर हुआ, जिसके बाद राज्य बाल आयोग की टीम ने शनिवार को मौके का निरीक्षण किया।
जानकारी के अनुसार, यह स्कूल एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो दिल्ली में पंजीकृत है। लेकिन जांच में सामने आया कि न तो स्कूल को किसी भी शैक्षणिक मान्यता प्राप्त संस्था से स्वीकृति मिली थी और न ही हॉस्टल संचालन के लिए कानूनी मंजूरी ली गई थी।
हॉस्टल का निरीक्षण करने गई बाल आयोग की टीम ने पाया कि वहां रहने वाले बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। न सुरक्षा मानक थे, न प्रशिक्षित स्टाफ। यह हॉस्टल स्कूल की संचालिका द्वारा नजदीक के एक किराए के मकान में चलाया जा रहा था।
शिकायतकर्ता महिला ने आयोग को बताया कि उसने अपने दोनों बेटों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विशेष देखरेख के इरादे से हॉस्टल में दाखिल कराया था। लेकिन जब वह हाल ही में उनसे मिलने पहुंचीं, तो बच्चों का व्यवहार असामान्य लगा। दोनों ने बाहर जाने की ज़िद की और बाद में बताया कि हॉस्टल में नाइट ड्यूटी पर तैनात एक कर्मचारी उन्हें यौन उत्पीड़न का शिकार बना रहा है।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया है। वह बनारस का निवासी है और मई के मध्य से हॉस्टल में काम कर रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि उसका पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं कराया गया था।
राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि स्कूल को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। बाल कल्याण समिति आने वाले सोमवार को हॉस्टल में रह रहे अन्य बच्चों से भी बातचीत करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी और बच्चे के साथ कोई दुर्व्यवहार न हुआ हो।







