लुधियाना- लुधियाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 132 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह कॉल सेंटर की आड़ में विदेशी नागरिकों को फर्जी वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजकर ठगी का शिकार बनाता था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं।
पुलिस के मुताबिक आरोपी माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर नकली वायरस चेतावनी भेजकर विदेशी नागरिकों को डराते थे। स्क्रीन पर दिखने वाले फर्जी कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करते ही पीड़ित सीधे गिरोह के सदस्यों तक पहुंच जाते थे। इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाते और पीड़ित के कंप्यूटर व मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे।
जांच में सामने आया कि गिरोह पीड़ितों को बैंक अकाउंट हैक होने, ईमेल चोरी होने या सिस्टम में आपत्तिजनक सामग्री मिलने का डर दिखाकर उनसे पैसे ऐंठता था। ठगी की रकम हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध माध्यमों से भारत लाई जाती थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.07 करोड़ रुपये नकद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 लग्जरी वाहन जब्त किए हैं। साथ ही 300 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के नेतृत्व में साइबर पुलिस और विशेष टीमों ने संधू टॉवर और सिल्वर ओक में छापेमारी कर कॉल सेंटरों को सील किया। जांच एजेंसियों के अनुसार हर ऑपरेटर को रोजाना कई कॉल करने का लक्ष्य दिया जाता था और हर टीम लाखों रुपये की हेराफेरी करती थी।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के मास्टरमाइंड फिलहाल दिल्ली और गुजरात में मौजूद हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं। मामले में आयकर विभाग को भी शामिल किया गया है और डिजिटल साक्ष्य, हवाला नेटवर्क व क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह गरीब परिवारों के युवक-युवतियों को जल्दी अमीर बनने का लालच देकर इस नेटवर्क में शामिल करता था। सभी आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।







