जावेद को भेजा गया जेल, रमेश सिंह की गिरफ्तारी के लिए जारी हुआ NBW, 3 जून को सुनाई जाएगी सजा
उत्तर प्रदेश। मऊ जिले में एक दशक पुराने फर्जीवाड़े के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। फर्जी पहचान और फोटो का इस्तेमाल कर सिम कार्ड हासिल करने के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका और उनके साथी जावेद आजमी को अदालत ने दोषी माना है। जावेद को जेल भेजा गया है, जबकि कोर्ट में हाज़िर न होने पर रमेश सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया है।
मामला 2010 में सामने आया था जब सहादतपुर निवासी सूर्यनाथ यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके रिश्तेदार भानु प्रताप की हथियार लाइसेंस वाली आईडी का दुरुपयोग कर किसी ने सिम कार्ड लिया है। खास बात यह थी कि फोटो फर्जी था, जबकि नाम और दस्तावेज असली थे।
जांच के दौरान सामने आया कि यह सिम कार्ड एक पीसीओ संचालक ने बेचा था। मामले की तह तक जाने पर पुलिस ने परदहां ब्लॉक के पूर्व प्रमुख रमेश सिंह काका और जावेद आजमी को आरोपी पाया और उनके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए और केस को मजबूती से रखा। कोर्ट ने सबूतों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया। जावेद आजमी को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेजा गया, जबकि रमेश सिंह की अनुपस्थिति के चलते कोर्ट ने उनके खिलाफ NBW जारी कर दिया।
रमेश सिंह काका का नाम पहले भी कई गंभीर मामलों से जुड़ चुका है। उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई हो चुकी है, और 67 केस विभिन्न जिलों में दर्ज हैं। अब ताज़ा सजा से उनका आपराधिक इतिहास और भी उजागर हो गया है। जावेद की सजा पर अंतिम फैसला 3 जून को सुनाया जाएगा।







