राजस्थान। साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक जनसेवा केंद्र संचालक की करतूत का खुलासा हुआ है। आरोपी ने मजदूर वर्ग के लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल किए। चार महीने में 40 से अधिक खातों के ज़रिए तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की रकम की हेराफेरी कर डाली। पुलिस ने “ऑपरेशन कोड ब्रेक” के तहत कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो और की तलाश जारी है।
दो परसेंट कमीशन का देता थे झांसा
बोदला क्षेत्र में संचालित एक जनसेवा केंद्र का ऑपरेटर मजदूर वर्ग के लोगों से संपर्क कर उन्हें दो फीसदी कमीशन का झांसा देता था। बदले में वह उनके बैंक खाते, डेबिट कार्ड और पासबुक हासिल कर लेता था। इन खातों में साइबर ठगी से मिली रकम जमा कराई जाती थी और बाद में उसे निकालकर मुख्य आरोपियों तक पहुंचाया जाता था।
तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से एक कार, चार मोबाइल फोन, सात डेबिट कार्ड और 16,800 नकद बरामद किए हैं। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
साहिल की शिकायत से हुआ खुलासा
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि रामनगर, जगदीशपुरा निवासी साहिल निगम के मोबाइल पर बार-बार लेन-देन के मैसेज आ रहे थे। जांच में पता चला कि अभय नामक युवक उसके खाते का इस्तेमाल कर रहा है। 2 अगस्त को साहिल ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की।
जांच में सामने आया कि जनसेवा केंद्र संचालक अभय ने साहिल से यह कहकर उसका खाता नंबर और डेबिट कार्ड लिया कि उसकी खुद की लिमिट खत्म हो गई है और पैसे आने हैं। बाद में अभय ने कार्ड अपने साथियों कार्तिक और प्रियांशु को दे दिया। इन लोगों ने खाते में आई रकम कई बार निकाली और फिर डेबिट कार्ड वापस कर दिया।







