गाजीपुर। मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़े लोगों के शस्त्र लाइसेंसों की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने गैंग के कथित सहयोगी समेत तत्कालीन थाना प्रभारी और एक क्षेत्रीय लेखपाल के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी कराने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जांच में स्थायी पते से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
पुलिस के अनुसार, वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण के निर्देश पर मुख्तार अंसारी गिरोह (आईएस-191) के सदस्यों और सहयोगियों को जारी शस्त्र लाइसेंसों की व्यापक जांच की जा रही है। इसी क्रम में मोहम्मद शाहिद के नाम पर जारी शस्त्र लाइसेंस की जांच के दौरान दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आई।
जांच में पता चला कि मोहम्मद शाहिद ने वर्ष 2001 में मुहम्मदाबाद क्षेत्र के एक किराये के मकान का पता स्थायी निवास के रूप में दर्शाकर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किया था। बाद में इसी लाइसेंस के जरिए कई बार हथियारों का क्रय-विक्रय भी किया गया।
सत्यापन के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मोहम्मद शाहिद का वास्तविक स्थायी निवास सैदपुर क्षेत्र में है, जबकि आवेदन में उसने मुहम्मदाबाद का पता दर्ज कराया था। आरोप है कि उस समय तैनात तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक और संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल ने भी बिना वास्तविक सत्यापन के उसी पते को सही बताते हुए लाइसेंस जारी करने की संस्तुति कर दी।
एसपी ग्रामीण अतुल सोनकर ने बताया कि प्रथम दृष्टया फर्जी पते के आधार पर शस्त्र लाइसेंस हासिल करने और सरकारी अभिलेखों में गलत जानकारी दर्ज कराने के साक्ष्य मिलने पर मोहम्मद शाहिद, तत्कालीन थाना प्रभारी मुहम्मदाबाद और संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







