चित्तौड़गढ़। नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता दिलाते हुए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की राजस्थान इकाई ने चित्तौड़गढ़ जिले में अवैध ड्रग निर्माण के एक बड़े ठिकाने का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में एक सुनियोजित गुप्त प्रयोगशाला से भारी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ, रसायन और उपकरण बरामद किए गए हैं। मौके से एक आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है।
सीबीएन कोटा परिक्षेत्र के उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल ने बताया कि चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में अवैध रूप से नशीले पदार्थ बनाए जाने की पुख्ता सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई। सूचना के सत्यापन के उपरांत सीबीएन के विभिन्न खंडों और निवारक व आसूचना प्रकोष्ठ की संयुक्त टीम गठित कर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
एकांत मकान में चल रही थी गुप्त प्रयोगशाला
संयुक्त टीम ने चित्तौड़गढ़ तहसील के सुरजना गांव से दूर एक सुनसान इलाके में बने बड़े मकान पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान मौके से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जबकि मकान के भीतर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस अवैध ड्रग निर्माण प्रयोगशाला संचालित होने का खुलासा हुआ।
लाखों की कीमत के मादक पदार्थ और रसायन जब्त
कार्रवाई के दौरान कुल 5.894 किलोग्राम मनोदैहिक पदार्थ बरामद किए गए। इसमें 107 ग्राम मेफेड्रोन पाउडर, 3.961 किलोग्राम मेफेड्रोन का कच्चा माल और 1.826 किलोग्राम एल्प्राजोलाम पाउडर शामिल है। इसके अलावा करीब 200 किलोग्राम रसायन, ड्रग निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और तस्करी में प्रयुक्त एक बाइक भी जब्त की गई है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने एक अन्य सहयोगी के साथ मिलकर इसी स्थान पर अवैध रूप से मेफेड्रोन का निर्माण कर रहा था। जब्त की गई समस्त सामग्री को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत सीज किया गया है।
पूरे नेटवर्क की कड़ी तलाश रही एजेंसियां
सीबीएन अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी से गहन पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां कच्चे माल की आपूर्ति, फंडिंग और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं। सीबीएन ने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार में शामिल तत्वों के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।







