नोएडा – तेजी से मुनाफा दिलाने के नाम पर ई-स्कूटी निवेश योजना चलाकर लोगों से करोड़ों रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को एक स्टार्टअप कंपनी बताकर निवेशकों को हर महीने सात हजार रुपये देने और तीन साल बाद रकम या स्कूटी लौटाने का भरोसा दिलाया था। इसी भरोसे पर दर्जनों लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई निवेश कर दी।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने भंगेल इलाके में बाकायदा दफ्तर खोलकर इस योजना को विश्वसनीय रूप दिया। ई-स्कूटी खरीद के नाम पर प्रति व्यक्ति 85 हजार रुपये लिए गए। कई निवेशकों ने एक से अधिक स्कूटी के लिए भी पैसा लगाया। शुरुआती महीनों में कुछ लोगों को मासिक भुगतान कर भरोसा जीता गया, जिससे योजना तेजी से फैलती चली गई।
कुछ समय बाद जब निवेशकों को तय रकम मिलनी बंद हुई और पैसा वापस मांगने पर टालमटोल शुरू हो गई, तब लोगों को ठगी का अंदेशा हुआ। इसी बीच आरोपी अचानक दफ्तर बंद कर फरार हो गए। पीड़ितों की शिकायत पर फेज-2 थाना पुलिस ने जांच शुरू की और कंपनी से जुड़े एक संचालक को गिरफ्तार कर लिया।
रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि यह ठगी सौरभ मिश्रा और गौरव मिश्रा नामक दो भाइयों द्वारा की गई। दोनों मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं और नोएडा में रहकर फर्जी कंपनी का संचालन कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, गौरव मिश्रा पहले से ही एक अन्य साइबर अपराध मामले में जेल में बंद है, जबकि कंपनी का संचालन उसके भाई सौरभ द्वारा किया जा रहा था। दोनों ने मिलकर “इको जैप स्मार्ट मोबिलिटी” नाम से कंपनी बनाई और ई-स्कूटी योजना के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बड़े पैमाने पर विज्ञापन किए थे। आकर्षक रिटर्न के दावे देखकर लोग बिना जांच-पड़ताल के निवेश करते चले गए। हालांकि, निवेशकों से ली गई रकम से न तो ई-स्कूटी खरीदी गई और न ही उसे किसी वैध कारोबार में लगाया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कई बैंक खातों की पहचान कर उनमें जमा रकम को फ्रीज कर दिया है। साथ ही, इस ठगी में परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की पड़ताल जारी है और अन्य पीड़ितों से भी आगे आने की अपील की गई है।







