दिल्ली- एनसीआर। पुलिस की अपराध शाखा ने नकली दवाइयां सप्लाई करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करोड़ों रुपये की दवाइयां जब्त की हैं। पुलिस दो सरगनाओं, निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और फार्मासिस्टों सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये नकली दवाइयां पहले हिमाचल प्रदेश की फैक्टरी में बनती थीं। बाद में इस फैक्टरी को शामली व गाजियाबाद में शिफ्ट कर दिया गया। जब्त की गई नकली दवाएं मधुमेह, माइग्रेन की बीमारी को ठीक करने में इस्तेमाल किया जाता है। इस रैकेट के तार दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में फैले हुए थे। शामली व गाजियाबाद स्थित फैक्टरी से भारी मात्रा में कच्चा माल, खाली मुद्रित बक्से, पैकेजिंग सामग्री और मशीनरी पार्ट्स जब्त किए गए हैं।
अनिल कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह सिर्फ उक्त इकाई का केयरटेकर और निर्माता था और नकली दवाओं के निर्माण का वास्तविक मास्टरमाइंड पंचकूला निवासी सुरेंद्र मलिक है। कई स्थानों पर छापेमारी की गई और आखिरकार अल्ट्रासेट नकली दवा की निर्माण इकाई के मास्टरमाइंड सुरेंद्र मलिक को भी हरियाणा के नरवाना से पकड़ लिया गया है। इसके बाद सरगना विकास चौहान को मंडोली एक्सटेंशन में उसके घर से पकड़ लिया गया। उसने शुरू में खुलासा किया कि वह उक्त नकली दवाएं रूड़की से खरीदता था, लेकिन निरंतर पूछताछ के बाद उसने खुलासा किया कि उसके पास राजेंद्र नगर, गाजियाबाद में एक विनिर्माण इकाई और न्यू डिफेंस कॉलोनी, भोपरा, गाजियाबाद में गोदाम है।
अभियुक्तों से बताया कि नकली अल्ट्रासेट दवा का निर्माण हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी की सुंदर नगर तहसील में एक फैक्ट्री में अनिल कुमार द्वारा किया जा रहा था। यहां बनने वाली इन नकली दवाओं को कूरियर के माध्यम से अन्य जगहों पर पहुंचाया जाता है।
गाजियाबाद में लगाई फैक्टरी
विकास चौहान ज्यादातर दवाएं राजेंद्र नगर औद्योगिक क्षेत्र, गाजियाबाद, यूपी में अपनी फैक्ट्री में बनाता था और बाकी दवाएं शाहरुख के माध्यम से रूड़की, उत्तराखंड मेें बनाता था। जांच के दौरान हिमाचल प्रदेश के सुंदर नगर में स्थापित फैक्ट्री की पहचान की गई और यह पता चला कि अनिल कुमार ने सुंदर नगर में फैक्ट्री बंद कर दी है और उसे शामली, यूपी में स्थानांतरित कर दिया है। मशीनें और अन्य सामग्री शामली पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टर से शामली का पता लिया गया। इसके बाद शामली में छापा मारा गया।
बरामद सामान
सात देशी-विदेशी कंपनियों की करोड़ों रुपए की दवाइयां, लगभग तीन लाख खाली जिलेटिन कैप्सूल के गोले, दो विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं। ब्लिस्टर किंग (रैपर में दवा भरने के लिए उपयोग किया जाता है), पंचिंग मशीन (गोलियों को आकार देने के लिए उपयोग किया जाता है) आदि भी बरामद हुआ। सभी बरामद मशीनें बड़े पैमाने पर दवाएं बनाने में सक्षम हैं। इसके अलावा 70 हजार नकद, डिफेंस कॉलोनी, गाजियाबाद में एक गोदाम, दस मोबाइल फोन, एक ईसीसीओ वैन, दो कार, आर एस ग्लोबल फार्मा की एक मुहर, बैच की छाप वाले टिकट भी बरामद हुए।







