फतेहपुर। बकेवर पुलिस ने सात जनवरी को घर के बरामदे में सो रहे कल्लू पाल हत्याकांड का खुलासा किया है। संपत्ति बंटवारे के लिए बड़े बेटे ने पिता को मौत के घाट उतारा था। हत्यारोपी बेटे को पुलिस ने जेल भेजा है। बकेवर थाने के पहाड़ीपुर निवासी कल्लू पाल (70) नहरामऊ स्थित खेत में आवास बनाकर रहता था। आवास के बाहर पान गुटखा की गुमटी संचालित करता था। सात जनवरी की रात कल्लू की सिर में प्रहार कर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने नहरामऊ चौराहे से अच्छेलाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस लाइन में एसपी उदयशंकर सिंह ने बताया कि अच्छेलाल कल्लू का बड़ा पुत्र है। दूसरा पुत्र हरिश्चंद्र और सबसे छोटा सुनील है। तीनों शादीशुदा है। कल्लू ने छोटे बेटे की शादी के दौरान अच्छेलाल की पत्नी के जेवर गिरवी रख दिए थे।
कुछ माह पहले खेत भी गिरवी रखे थे। गिरवी जेवरात छुड़ाने के बाद कल्लू ने अपने पास ही रख लिए थे। बेटे हरिश्चंद्र और सुनील को पक्का मकान भी दे रखा था। बड़ा बेटा अच्छेलाल अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता था। जेवरात, गिरवी जमीन को छुड़ाने और संपत्ति बंटवारे को लेकर अच्छेलाल का कल्लू से अक्सर विवाद होता था। कल्लू कहता था कि वे लोग कमाकर जमीन छुड़वाए। अच्छेलाल को लगा कि पिता की मौत के बाद ही संपत्ति में तीनों भाइयों के अलग-अलग हिस्से हो सकेंगे। यही कल्लू की हत्या की प्रमुख वजह बनी। सात जनवरी की रात अच्छेलाल करीब रात 12 बजे खेत स्थित कल्लू के आवास पहुंचा। जहां पिता कल्लू के सोते समय गुमटी के डंडे से प्रहार कर हत्या कर दी थी।
इसके बाद घर चला गया था। विवेचना के दौरान सर्विलांस की मदद से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अच्छेलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। कल्लू को सरकारी आवास के तहत कॉलोनी मिली थी, जिससे खेत पर आवास बनाया था। इसको लेकर भी आरोपी विवाद करता था। एसपी ने बताया कि करीब पांच साल पहले पिता-पुत्र के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान अच्छेलाल ने पिता पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था। हमले में कल्लू बाल-बाल बचा था। पहाड़ीपुर गांव के कल्लू पाल हत्याकांड के बाद उसके खेत से मिट्टी खनन होने की बात सामने आई थी। बीते माह एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों से खनन माफियाओं के खिलाफ जबरन मिट्टी खनन की शिकायत की थी। पुलिस की जांच में हत्या के पीछे यही वजह सामने आई। प्रशासन ने भी मिट्टी खनन की निष्पक्ष जांच का दावा किया था। अब मिट्टी पर प्रशासन की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है।







