लखनऊ- उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने आयुष्मान भारत योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी पहचान और तकनीकी हेरफेर के जरिये हजारों अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाकर सरकारी योजना का गलत लाभ दिला रहा था। कार्रवाई 24 दिसंबर को लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार इलाके में की गई।
एसटीएफ के अनुसार, अब तक इस गिरोह ने दो हजार से अधिक ऐसे लोगों के आयुष्मान कार्ड तैयार कराए, जो योजना के लिए पात्र नहीं थे। गिरफ्तार आरोपियों में इम्प्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी (ISA) के वर्तमान और पूर्व कर्मचारी, साथ ही स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) से जुड़ा एक एक्जीक्यूटिव भी शामिल है।
एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि इसी नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को जून 2025 में प्रयागराज से पकड़ा गया था, जहां 84 फर्जी आयुष्मान कार्ड बरामद हुए थे। उसी मामले की जांच के दौरान लखनऊ में सक्रिय इस गिरोह की जानकारी सामने आई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
एसटीएफ ने विजयनगर कॉलोनी, खरगापुर स्थित एक किराये के मकान से प्रतापगढ़, बाराबंकी, गाजीपुर, इटावा और लखनऊ के रहने वाले सात आरोपियों को हिरासत में लिया। सभी आरोपी एक ही स्थान पर रहकर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए हैं। इनमें कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, आयुष्मान कार्ड से जुड़ा डेटा, अपात्र कार्डों के स्क्रीनशॉट, बैंक से जुड़े दस्तावेज, पहचान पत्र, चेकबुक, प्रिंटर, स्कैनर, क्यूआर कोड, सिम कार्ड, नकदी और एक कार शामिल है।
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में ओटीपी प्रक्रिया को बायपास कर अपात्र व्यक्तियों के नाम जोड़ते थे। इसके बाद ISA और SHA स्तर पर अंदरूनी सेटिंग के जरिए कार्डों को मंजूरी दिलाई जाती थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क को चंद्रभान वर्मा संचालित कर रहा था, जो प्रति आयुष्मान कार्ड के बदले हजारों रुपये वसूलता था।
गिरोह के सदस्य अस्पतालों में आयुष्मान मित्र और कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत लोगों की मदद से कार्डों में तकनीकी खामियां ठीक कराते थे, ताकि इन्हीं फर्जी कार्डों के जरिए अलग-अलग अस्पतालों में मुफ्त इलाज दिखाकर अवैध कमाई की जा सके।
एसटीएफ ने सभी आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और अस्पतालों की भूमिका की भी जांच कर रही है।







