उत्तर प्रदेश। गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में मां-बेटी की बेरहमी से हत्या किए जाने की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। शनिवार को पुलिस ने बताया कि वारदात को अंजाम किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि पड़ोस में रहने वाले युवक रजत उर्फ रितेश रंजन (21) ने ही दिया था। आरोपी मृतका विमला को लंबे समय से ‘बुआ’ कहकर संबोधित करता था और घर में उसकी सहज आवाजाही के कारण किसी को उस पर शक तक नहीं हुआ।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी प्रेमिका के पिता पर चढ़े कर्ज को उतारने और उसे महंगा मोबाइल फोन खरीदे जाने की योजना के लिए लूट की वारदात रची। विरोध करने पर उसने विमला और उनकी बुजुर्ग मां शांति देवी की हथौड़े से हत्या कर दी।
दबोचा गया आरोपी, भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने शुक्रवार देर रात रजत को उसके घर से गिरफ्तार किया। तलाशी में उसके पास से 18 ग्राम पिघला हुआ सोना, गहने, 50 हजार रुपए नकद और चोरी के मोबाइल बरामद किए गए। हत्या में उपयोग किया गया हथौड़ा भी पुलिस ने बरामद कर लिया। शनिवार को आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
एसपी सिटी अभिनव त्यागी के अनुसार, दोनों महिलाओं की हत्या 23 नवंबर की रात की गई थी। रजत एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी का बेटा है और बीए फाइनल ईयर का छात्र है। वह वर्ष 2019 से मोहल्ले की एक लड़की के साथ रिलेशनशिप में था, जिसके बहाने वह अक्सर विमला के घर आता-जाता था।
शराब पीने के बहाने आया घर, विरोध करने पर दोनों की हत्या
तफ्तीश में सामने आया कि घटना वाली रात आरोपी शराब पीने के नाम पर घर पहुंचा था। इसी दौरान उसने अलमारी से रूपये और गहने निकालने की कोशिश की, लेकिन विमला ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसने कमरे में पड़े हथौड़े से विमला पर कई वार कर दिए। शांति देवी ने शोर सुनकर करवट बदली तो आरोपी ने उन्हें भी निशाना बनाया और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
वारदात के बाद आरोपी ने निभाया ‘शोक’ का नाटक
हत्या के बाद रजत लगभग साढ़े चार लाख रुपये और गहने लेकर घर पहुंच गया। अगले दिन वारदात सामने आने पर वह पुलिस के साथ आरोपियों को खोजने का दिखावा करता रहा। दाह संस्कार में शामिल होकर लोगों के सामने रोने-बिलखने का अभिनय भी किया ताकि शक दूर बना रहे। लेकिन पुलिस जांच में वह धीरे-धीरे संदेह के दायरे में आ गया।
मोबाइल में मिली तस्वीरों ने पोल खोली
पुलिस ने डबल मर्डर की जांच में लगभग 900 सीसीटीवी फुटेज खंगाले और 200 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की सीडीआर जांची। जब जांच रजत के फोन तक पहुंची तो उसमें विमला के गहनों और कैश की तस्वीरें मिलीं। लूट के बाद उसने खुद ही नकदी गिनते हुए वीडियो और फोटो बनाईं, जो उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत साबित हुआ। कड़ाई से पूछताछ में वह टूट गया और पूरी वारदात कबूल कर ली।
जांच लूट की दिशा में कैसे मुड़ी?
शुरुआत में मामला पारिवारिक विवाद और संपत्ति से जुड़ा माना जा रहा था, क्योंकि घटनास्थल से हथौड़े पर फिंगरप्रिंट तक नहीं मिले थे। लेकिन जब विमला की बड़ी बहन लखनऊ से पहुंचीं, तो उन्होंने घर से ऑपरेशन के लिए रखे पैसों और गहनों के गायब होने की बात बताई। इसी सुराग के आधार पर जांच का फोकस लूट पर गया और आरोपी तक पहुंच आसान हो गई।







