ग्रेटर नोएडा- नोएडा एसटीएफ ने हाउसिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर किए जा रहे लोन फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया कि एक संगठित गिरोह ने फर्जी बिल्डर प्रोजेक्ट और काल्पनिक खरीदारों के नाम पर करोड़ों का होम लोन हासिल किया। कुल धोखाधड़ी की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
गुरुवार को सूरजपुर क्षेत्र में की गई कार्रवाई में टीम ने मास्टरमाइंड रामकुमार के साथ आठ सदस्यों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों में बैंकिंग सेक्टर से प्रशिक्षित पेशेवर, एमबीए, विधि और कंपनी सेक्रेटरी जैसे शिक्षित लोग शामिल हैं, जो बिल्डरों और कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से योजना को अंजाम देते थे।
तफ्तीश के दौरान एसटीएफ को सैकड़ों फर्जी दस्तावेज, 126 बैंक पासबुक-चेकबुक, 170 डेबिट कार्ड, 45 आधार कार्ड, 27 पैन कार्ड, लग्जरी वाहन, लैपटॉप और नकली रजिस्ट्री सहित भारी मात्रा में सामग्री मिली। गिरोह द्वारा उपयोग किए जा रहे 220 से अधिक बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले फर्जी बिल्डर और निवेशकों की प्रोफाइल तैयार करते थे। इसके बाद काल्पनिक संपत्तियों के नाम पर होम लोन पास करवाकर रकम अपने नेटवर्क के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे। कई बार यह लोन ऐसी संपत्तियों पर भी स्वीकृत करा लेते थे जो मौजूद ही नहीं थीं।
पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ, वाराणसी और हरिद्वार सहित कई शहरों में सक्रिय था। उन्होंने 20 से ज्यादा शेल कंपनियां बनाकर फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से धन की निकासी और ट्रांजैक्शन का जाल तैयार कर रखा था।
एक मामले में गिरोह ने दिल्ली की मृत महिला रतनावासुदेवा की जगह एक अन्य महिला को खड़ा कर दिया और उनकी संपत्ति को तीसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करके 4.8 करोड़ रुपये का लोन भी पास करा लिया।
इस गैंग का लिंक मार्च में गिरफ्तार बदमाश अनिल शर्मा से भी जुड़ा है, जिसने एलआईसी हाउसिंग से 1.25 करोड़ रुपये का फर्जी लोन लेने के लिए जाली बैनामा तैयार कराया था।
एसटीएफ का कहना है कि गिरोह के हर सदस्य की भूमिका तय थी—कोई नकली दस्तावेज तैयार करता, कोई बैंकिंग प्रक्रिया संभालता, तो कोई फर्जी खरीदार और बिल्डर से संपर्क साधकर डील को अंतिम रूप देता।







