बिहार। मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रही बड़ी ठगी का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। फर्जी चिट फंड कंपनी का सहारा लेकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूलने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने पकड़ लिया है। सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और गिरोह की गतिविधियों की परतें खुल रही हैं।
नेपाल निवासी युवक की शिकायत से खुला मामला
ठगी का खुलासा तब हुआ जब नेपाल के मोरतहरी जिले के गोसल्ला थाना क्षेत्र निवासी रंजीत कापड़ ने अहियापुर थाने में मामला दर्ज कराया। रंजीत ने बताया कि सुजन दुनगाना, हेमराज मल्ला, यशराम तमांड और भरत अधिकारी ने उसे सरकारी नौकरी जैसा पद दिलाने का भरोसा दिलाया और धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर पैसे ऐंठ लिए।
रंजीत को पहले कोल्हुआ पैगंबरपुर में राहुल कुमार के घर बुलाया गया और बाद में बैरिया स्थित संतोष कुमार के मकान में एक सप्ताह की ट्रेनिंग कराई गई।
नौकरी का झांसा और 2.20 लाख की ठगी
आरोपियों ने पीड़ित से नकद और बैंक खातों के जरिए कुल 2 लाख 20 हजार रुपये ले लिए। ट्रेनिंग के दौरान उसे यह कहा गया कि यदि वह तीन–चार अन्य लोगों को जोड़ देगा, तो उसकी नौकरी पक्की कर दी जाएगी और वेतन भी मिलने लगेगा। यह पूरी प्रक्रिया मल्टी-लेवल फ्रॉड की ओर इशारा करती है।
अन्य पीड़ितों ने भी पुलिस को बताया है कि उनसे करीब 4.5 लाख रुपये ठगे गए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, गिरोह के लिंक तलाशने में जुटी टीम
अहियापुर थाना पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल है और कितने युवाओं को अब तक निशाना बनाया गया है। पुलिस जल्द मामले से जुड़े अन्य सदस्यों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है।







