नोएडा। देहरादून में बीते 14 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को गोली मारने वाले जींद निवासी युवक सुनील का शव मंगलवार को उनके पैतृक नगर लाया गया। जहां परिवार और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने नया मोड़ तब लिया जब परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और आत्महत्या के पीछे पुलिस उत्पीड़न को जिम्मेदार ठहराया।
“पुलिस ने जानबूझकर फंसाया, सुनील को मरने के लिए मजबूर किया” – परिजनों का आरोप
मृतक के भाई अधिवक्ता संजय ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना कोई कानूनी नोटिस दिए सुनील को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की।
उनका कहना है कि जींद पुलिस ने हरिद्वार पुलिस को गलत जानकारी देकर सुनील को “गैंगस्टर” बताया, जबकि उसके खिलाफ केवल आईटी एक्ट और धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज थे। उन्होंने दावा किया कि सुनील ने अपनी सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी।
जातिगत पक्षपात का भी आरोप
संजय ने कहा कि तत्कालीन एसपी सुमित कुमार और घायल सब-इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह एक ही जाति के हैं और यही कारण रहा कि पुलिस ने निष्पक्षता नहीं दिखाई। “मेरा भाई शरीफ और सीधे-साधे स्वभाव का था। उसे अपराधी बताकर बदनाम किया गया,” संजय ने कहा।
पुलिस का बयान: आत्महत्या से पहले दी थी चेतावनी
जींद के एसपी कुलदीप सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस टीम ने हरिद्वार और देहरादून पुलिस के सहयोग से सुनील की तलाश की। देहरादून के एक मकान में दबिश के दौरान जब पुलिस ने दरवाजा खुलवाया, तो सुनील को चेतावनी दी गई। बावजूद इसके उसने खुद को गोली मार ली।
इस घटना में एक सब-इंस्पेक्टर भी घायल हुआ, जिसका उपचार चल रहा है।
CCTV फुटेज में दिखी पूरी घटना
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि सुनील ने खुद ही गोली चलाई, जो सब-इंस्पेक्टर को लगी। यह फुटेज जांच में शामिल किया गया है।
परिजनों की शिकायत पर जांच शुरू
सुनील के परिजनों ने पुलिस को ईमेल के माध्यम से विस्तृत शिकायत भेजी है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी गई है।
एसपी कुलदीप सिंह ने कहा, “मामले में कोई भी निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने लाया जाएगा। मीडिया से अपील है कि अफवाहों से बचें।”







