शिवहर। लंबे समय बाद शिवहर में निगरानी विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला भू-अर्जन कार्यालय के एक लिपिक को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई समाहरणालय परिसर में बुधवार सुबह की गई, जहां लिपिक विजय कुमार श्रीवास्तव को 70 हजार रुपये लेते हुए टीम ने रंगे हाथ दबोच लिया। इस घटना के बाद जिला कार्यालय परिसर में अफरातफरी मच गई और कर्मचारियों में हड़कंप फैल गया।
निगरानी विभाग के डीएसपी सुजीत कुमार सागर ने बताया कि शिकायत शहर के बभनटोली गांव के रहने वाले पप्पू तिवारी की ओर से की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि रेलवे की नई परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे की फाइल पास कराने के लिए भू-अर्जन कार्यालय में 70 हजार रुपये की मांग की जा रही है। जांच के बाद विभाग ने 17 जून को इस पर प्राथमिकी दर्ज की थी। बुधवार को जैसे ही कार्यालय खुला, निगरानी टीम पहले से तैयार बैठी थी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय रकम कर्मचारी को सौंपी, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे धर दबोचा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद डीएसपी सागर ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी रकम की मांग केवल एक लिपिक के स्तर पर संभव नहीं लगती। प्रारंभिक पूछताछ के बाद संकेत मिल रहे हैं कि इस मामले में कई अन्य अधिकारी भी संलिप्त हो सकते हैं। गिरफ्तार लिपिक से अतिथि गृह में घंटों पूछताछ की गई, जिसमें अन्य कर्मियों और अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। विभाग अब इस घोटाले में गहराई से जांच कर रहा है और अन्य संभावित दोषियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि यह रिश्वतकांड नई रेलवे लाइन परियोजना से जुड़ा है, जिसमें शिवहर और आसपास के इलाकों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। पप्पू तिवारी की करीब 25 डिसमिल जमीन अधिग्रहण में गई थी, जिसकी मुआवजा राशि लगभग 35 लाख रुपये तय की गई थी। आरोप है कि भुगतान पास कराने के लिए उनसे बार-बार रिश्वत मांगी जा रही थी। थक-हारकर उन्होंने निगरानी विभाग से संपर्क किया। पप्पू का यह भी दावा है कि इस योजना के तहत 15 से अधिक अन्य लाभार्थियों से भी दो प्रतिशत तक की अवैध राशि वसूली जा चुकी है।
शिवहर जिले में निगरानी विभाग की यह सातवीं बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2008 में पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला था, जब तत्कालीन सिविल सर्जन को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। इसके बाद वर्षों में बैंक अधिकारियों, थाना प्रमुखों, कोषागार व भवन निर्माण विभाग के कर्मचारियों तक को घूसखोरी में पकड़ा जा चुका है। 2025 की इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की नजरें अब भी पैनी हैं। विभाग की अगली कार्रवाई अब उन अधिकारियों पर केंद्रित होगी, जिनका नाम पूछताछ में सामने आया है।







