नई दिल्ली — वसंत कुंज स्थित एक निजी आश्रम के स्वयंभू धर्मगुरु स्वामी चैतन्यानंद उर्फ पार्थ सारथी पर छात्राओं से छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों के बाद पुलिस ने उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच शुरू कर दी है। अब तक 17 से अधिक छात्राओं ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार की शिकायतें दी हैं। जांच में सामने आया है कि यह कोई पहली घटना नहीं है — स्वामी के खिलाफ वर्ष 2009 में भी एक महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का केस दर्ज हो चुका है।
पहला मामला: फर्जी पुलिस अफसर बनकर महिला को किया था परेशान
दक्षिण दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में रहने वाली एक महिला ने 2009 में आरोप लगाया था कि स्वामी चैतन्यानंद ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महीनों तक उसे फोन कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 15 दिसंबर 2009 को रात 3 बजे आरोपी ने महिला को अशोभनीय भाषा में कॉल किया। महिला के शिकायत करने पर IPC की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी (FIR नंबर 102/2009)। इस केस में उसे गिरफ्तार तो किया गया, लेकिन मामला जमानती धाराओं का होने के कारण वह जल्द ही थाने से ही रिहा हो गया।
छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार के बढ़ते आरोप
ताजा मामले में आश्रम में पढ़ाई कर रहीं छात्राओं ने आरोप लगाया है कि धर्मगुरु ने बार-बार अपने प्रभाव और नंबरों के बहाने से लड़कियों को अपने निजी कक्ष में बुलाया और उनके साथ अनुचित हरकतें कीं। वर्ष 2016 में एक पीजीडीएम छात्रा ने शिकायत दी थी कि आरोपी ने ज्यादा अंक देने के नाम पर उसे कमरे में बुलाया और छेड़छाड़ की।
छात्रा का आरोप है कि जब वह विरोध करती, तो आरोपी जानबूझकर उसके नंबर काट देता और फिर दबाव बनाकर मुलाकात के लिए मजबूर करता। इस मामले में फिलहाल कोर्ट में ट्रायल चल रहा है।
धमकी, फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों के आरोप
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी पर गंभीर आरोपों के अलावा फर्जी पहचान बनाने (धारा 354(3)), धोखाधड़ी (धारा 318(4)) और नकली दस्तावेजों का प्रयोग (धारा 336(3), 340(2)) करने के भी साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा महिलाओं को धमकाने (धारा 351(2)) और अश्लील प्रस्ताव देने (धारा 75(2) BNS) के तहत भी केस दर्ज किया गया है।
एयरफोर्स के माध्यम से भी मिली थीं शिकायतें
सूत्रों के अनुसार, कुछ पीड़िताओं ने एयरफोर्स के माध्यम से भी आश्रम प्रशासन को शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस के अनुसार उन्हें आधिकारिक रूप से एयरफोर्स से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि पुलिस अधिकारी इस दिशा में भी जांच कर रहे हैं।
आरोपी के खिलाफ एलओसी जारी, आश्रम की भूमिका की भी जांच
पुलिस ने आरोपी के फरार होने की आशंका को देखते हुए लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कर दिया है। साथ ही आश्रम के प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने वर्षों तक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कानूनी सीमाएं और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
वर्तमान में आरोपी पर जिन धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें अधिकतर में तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है और ये जमानती अपराध की श्रेणी में आती हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है। हालांकि, गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।







