कानपुर। नेटवर्क मार्केटिंग और गैर-प्रमाणित आयुर्वेदिक दवाओं की आड़ में देशभर के 60 हजार से अधिक युवाओं को ठगने वाले एक बड़े रैकेट का कानपुर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। अर्रा रोड स्थित मंगलम गार्डन से पुलिस ने गिरोह के 6 सक्रिय सदस्यों को धर दबोचा। हालांकि, कंपनी के दो सीएमडी और सरगना समेत 10 से अधिक आरोपित अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल और एडीसीपी ऑपरेशन्स सुमित सुधाकर रामटेके के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में सामने आया कि यह गिरोह ‘विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से फर्जी कंपनी चला रहा था। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के बेरोजगार युवाओं को 25 से 50 हजार रुपये प्रति माह सैलरी का झांसा देकर बुलाया जाता था। इसके बाद ट्रेनिंग और नेटवर्क से जुड़ने के नाम पर उनसे 12 से 30 हजार रुपये तक ऐंठ लिए जाते थे।
गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वे अलग-अलग होटलों में सेमिनार आयोजित कर फर्जी प्रमोशन और महंगी गाड़ियों के इनाम बांटने का नाटक करते थे, जिससे युवा लालच में आ जाएं। इसके बाद ट्रेनिंग सेंटरों में युवाओं का मनोवैज्ञानिक तरीके से ब्रेनवॉश किया जाता था ताकि वे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी इस जाल में फंसाएं। दो नए लोग न जोड़ने पर जमा पैसे डूबने और सैलरी न देने की धमकी दी जाती थी। अकेले कानपुर यूनिट में करीब दो हजार लोग इस ठगी का शिकार बन चुके थे।







