स्पेशल सेल की कार्रवाई में बड़ा खुलासा, आरोपी के पास से मिले 10 देशों के सिम और जाली पासपोर्ट
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद आदिल हुसैनी के तार अब एक विदेशी परमाणु वैज्ञानिक से जुड़ने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियों की जांच और तेज हो गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आदिल के पास मिले 10 देशों के सिम कार्ड आखिर कहां से आए और इनके जरिए उसने पाकिस्तान या अन्य देशों को क्या जानकारी भेजी।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कई देशों की यात्रा कर चुका है और उसके पास जाली पहचान पत्रों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है।
स्पेशल सेल की कार्रवाई में बड़ा खुलासा
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने झारखंड के जमशेदपुर निवासी 59 वर्षीय मोहम्मद आदिल हुसैनी को सीमापुरी इलाके से गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि आदिल झारखंड में सक्रिय एक फर्जी पासपोर्ट रैकेट से जुड़ा था और विदेशी एजेंसियों को संवेदनशील सूचनाएं पहुंचाने में उसकी भूमिका संदिग्ध है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के कई नाम हैं — सैयद आदिल हुसैन, नसीमुद्दीन और सैयद आदिल हुसैनी — जिनका इस्तेमाल वह पहचान छिपाने के लिए करता था। पुलिस ने उसके पास से एक असली और दो जाली पासपोर्ट बरामद किए हैं।
जमशेदपुर से संचालित था फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क जमशेदपुर से संचालित किया जा रहा था, जहां जाली दस्तावेजों की मदद से नकली पासपोर्ट और पहचान पत्र तैयार किए जाते थे। पुलिस ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 61(2) (आपराधिक साजिश), 318 (धोखाधड़ी), 338 (महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी) और 340 (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के उपयोग) के तहत गिरफ्तार किया है।
विदेश यात्रा और संवेदनशील संपर्कों की जांच जारी
अधिकारियों ने बताया कि आदिल कई खाड़ी देशों की यात्रा कर चुका है और वह विदेश में तैनात एक परमाणु वैज्ञानिक के संपर्क में था। उसके भाई अख्तर हुसैनी को मुंबई पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। अख्तर पर भी फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कई पासपोर्ट तैयार कराने और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को जानकारी पहुंचाने का आरोप है।
फिलहाल आदिल को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है, ताकि उसके नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और जासूसी चैनल की गहराई से जांच की जा सके। खुफिया एजेंसियां इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला मानते हुए उच्चस्तरीय निगरानी कर रही हैं।







