नई दिल्ली- दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े रियल एस्टेट ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो देश के कई राज्यों में फैला हुआ था। यह गिरोह दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश और गोवा में महंगी और प्रीमियम प्रॉपर्टी को कम कीमत पर दिलाने का लालच देकर करीब 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे चुका था।
पुलिस ने इस मामले में मोहित गोगिया (38), विशाल मल्होत्रा (42), सचिन गुलाठी (40), अभिनव पाठक (35) और भरत छाबड़ा (33) को गिरफ्तार किया है। गिरोह का मास्टरमाइंड राम सिंह उर्फ बाबाजी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार देशभर में छापेमारी कर रही है।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब दिल्ली की एक महिला ने गुरुग्राम स्थित डीएलएफ कैमेलियाज में एक प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर 12.04 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि आरोपियों ने खुद को बैंक नीलामी से खरीदी गई प्रॉपर्टी का मालिक बताकर विश्वास में लिया।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रॉपर्टी को विवादित या गिरवीशुदा बताने के बजाय वैध दिखाते थे। पीड़िता ने अगस्त से अक्तूबर 2024 के बीच आरटीजीएस और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी, लेकिन बाद में जब दस्तावेजों की जांच कराई गई तो बैंक ने उन्हें पूरी तरह जाली करार दिया।
क्राइम ब्रांच ने केस दर्ज कर सबसे पहले उन बैंक खातों की जांच की, जिनमें ठगी की रकम जमा हुई थी। टेक्निकल सर्विलांस और वित्तीय ट्रेल के आधार पर दिल्ली-एनसीआर, भोपाल, मुंबई समेत कई शहरों में छापेमारी की गई। 22 नवंबर 2025 को पुलिस को बड़ी सफलता तब मिली, जब मोहित गोगिया को डोईवाला (ऋषिकेश–देहरादून रोड) से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
जांच में सामने आया कि मोहित, फरार आरोपी राम सिंह उर्फ बाबाजी के साथ मिलकर लंबे समय से इस ठगी नेटवर्क को चला रहा था। मोहित का काम अलग-अलग राज्यों में महंगी प्रॉपर्टी चिन्हित करना था, खासकर वे संपत्तियां जो विवादित, गिरवी या फर्जी होती थीं। इसके बाद भरत छाबड़ा इन प्रॉपर्टी के नकली कागजात तैयार करता था।
विशाल मल्होत्रा, जो पेशे से प्रॉपर्टी डीलर है, ने बाबाजी के निर्देश पर करंट अकाउंट खुलवाया, जबकि दूसरा अकाउंट सचिन गुलाठी ने खोला। ठगी की रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी। अभिनव पाठक, जो दवाइयों का कारोबारी है, पीड़ितों की मुख्य आरोपियों से मुलाकात करवाने की भूमिका निभाता था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि ठगी से मिली रकम का 60 प्रतिशत हिस्सा राम सिंह उर्फ बाबाजी को दिया जाता था, जबकि शेष 40 प्रतिशत रकम गिरोह के अन्य सदस्यों में बांट ली जाती थी। पुलिस अब फरार मास्टरमाइंड की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और मामले में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।







