वाराणसी। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को छह दिन तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर करीब 52 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को ट्राई अधिकारी, आईपीएस और जज बताकर वीडियो कॉल के जरिए फर्जी कोर्ट पेशी तक कराई। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
चौबेपुर थाना क्षेत्र के चिरईगांव नरपतपुर निवासी प्रशांत सिंह ने पुलिस को बताया कि 11 दिसंबर को उनके पास एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को ट्राई का पीआरओ बताते हुए कहा कि उनके नाम से जारी एक सिम का दुरुपयोग हो रहा है। इसके बाद दूसरे नंबर से वीडियो कॉल कर खुद को एसआई बताते हुए एक युवती ने बातचीत कराई और फिर एक व्यक्ति को आईपीएस अधिकारी के रूप में पेश किया गया।
कथित आईपीएस अधिकारी ने दावा किया कि प्रशांत सिंह का नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है और उनके डेबिट कार्ड से जुड़े खाते में संदिग्ध लेनदेन हुआ है। जांच के नाम पर उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और कोर्ट में पेशी का नाटक भी किया गया, जिसमें फर्जी जज और पुलिस अधिकारी दिखाई दिए।
इस दौरान अलग-अलग आदेश दिखाकर कभी जमानत तो कभी सुरक्षा राशि के नाम पर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर कराए गए। डर और दबाव में आकर प्रशांत सिंह ने अपने खातों से आरटीजीएस के माध्यम से विभिन्न बैंकों में कुल 51.98 लाख रुपये भेज दिए। ठगों ने भरोसा दिलाया कि 48 से 72 घंटे में पूरी रकम वापस मिल जाएगी।
जब तय समय पर पैसा वापस नहीं आया तो परिजनों से चर्चा के बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामला संगठित साइबर गिरोह से जुड़ा है और बैंक खातों व कॉल डिटेल्स के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है।







