बिहार। समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां जमीन पर कब्जा करने की नीयत से भू माफियाओं ने 63 वर्षीय रिटायर्ड सैनिक को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखा दिया। झखरा गांव के निवासी अरुण कुमार ठाकुर पिछले कई महीनों से खुद को “जिंदा” साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
सीने पर ‘मैं जिंदा हूं’ की तख्ती लगाकर मांग रहे इंसाफ
रिटायर्ड फौजी अरुण कुमार ठाकुर ने जिला प्रशासन से लेकर अंचल कार्यालय तक आवेदन देकर खुद के जीवित होने की जानकारी दी है। इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों में उनका नाम मृतकों की सूची में दर्ज है। हताश होकर अरुण ठाकुर अब अपने सीने पर “मैं जिंदा हूं” लिखी तख्ती लगाकर गांव और कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, ताकि प्रशासन उनकी बात सुने।
जमीन कब्जाने की साजिश का आरोप
अरुण ठाकुर ने बताया कि वह वर्ष 2003 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। दो वर्ष पूर्व उनकी पत्नी का निधन हो चुका है। उनके दो बेटे नीतेश कुमार और गंगेश कुमार हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2014 में कुछ भू माफियाओं ने उनकी जमीन हड़पने के उद्देश्य से फर्जी तरीके से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा दिया।
इस साजिश का खुलासा तब हुआ, जब हाल ही में कुछ लोग उनकी कृषि भूमि पर कब्जा करने पहुंचे। उन्होंने अपनी बड़ी बहू चिंतामणि को मौके पर भेजा, जहां ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि अरुण ठाकुर को करीब 11 साल पहले ही कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। ग्रामीणों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र की छायाप्रति भी उपलब्ध कराई।
अंचल कार्यालय से डीएम तक लगाई गुहार
मामले की जानकारी मिलने के बाद अरुण ठाकुर अपनी बड़ी बहू के साथ कल्याणपुर अंचल कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद वे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा को लिखित शिकायत सौंपी।
नशे में जमीन लिखवाने का भी आरोप
अरुण ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि भू माफियाओं ने उनके बेटों को शराब की लत लगवाकर वर्ष 2024 और 2025 में नशे की हालत में करीब छह कट्ठा जमीन अपने नाम लिखवा ली। उन्हें इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई, जब जमीन पर कब्जे की कोशिश शुरू हुई।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बताया कि मामले में आवेदन प्राप्त हुआ है और इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर अरुण ठाकुर के नाम जारी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि जमीन माफियाओं के हौसले और आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।







