नई दिल्ली- बाहरी दिल्ली क्षेत्र में पुलिस ने बुधवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों की लगभग 3.60 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की। यह बरामदगी शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी दो कारों से हुई। पुलिस ने मौके पर मौजूद चार लोगों को गिरफ्तार भी किया, जिनमें एक बीए का छात्र भी शामिल है।
प्राथमिक पूछताछ में सभी आरोपियों ने दावा किया कि यह पैसा उनका नहीं था और वे केवल इसे एक तय पते पर पहुंचाने आए थे। बदले में उन्हें कमीशन देने का वादा किया गया था। उन्होंने बताया कि नोट उन्हें दो व्यक्तियों — तरुण और आशीष — द्वारा भेजे गए थे। पुलिस अब इन दोनों की तलाश में जुट गई है।
गिरफ्तार हुए आरोपियों की पहचान हर्ष, टेकचंद, लक्ष्य और विपिन के रूप में हुई है।
हर्ष: रोहिणी सेक्टर-25 का निवासी, बीए का छात्र।
टेकचंद: 10वीं पास, पहले जिम ट्रेनर, इस समय बेरोजगार।
लक्ष्य: बृजपुरी का रहने वाला ग्रेजुएट, हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में कॉन्ट्रैक्ट जॉब शुरू की।
विपिन: सरकारी क्वार्टर (फिरोज शाह रोड) में रहने वाला कर्मचारी, मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर का निवासी।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, मामले में धोखाधड़ी, साजिश और बैंक नोट्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को पता था कि बंद हो चुके नोट रखना गैर-कानूनी है और उनके पास इस नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं था।
उत्तरी-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि अशोक विहार पुलिस को सूचना मिली थी कि बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित नोटों की डिलीवरी होने वाली है। इस इनपुट के बाद पुलिस टीम ने तुरंत छापेमारी की और दो कारों से भरे बैगों में पुरानी करेंसी बरामद की।
पूछताछ में आरोपियों ने अपने-अपने कारण भी बताए —
टेकचंद ने कहा कि नौकरी छूटने और आर्थिक संकट की वजह से वह इस चक्कर में फंस गया।
हर्ष ने जल्दी पैसा कमाने का लालच बताया।
लक्ष्य ने बताया कि उसकी फरवरी में शादी है और लोन चुकाने के दबाव में उसने जोखिम उठाया।
विपिन ने खुलासा किया कि 2021 से वह तरुण और आशीष के संपर्क में था और उन्हें बताया गया था कि पुराने नोटों को बदलने पर मोटा पैसा मिलेगा।
पुलिस अब इस रैकेट के मुख्य संचालकों तरुण और आशीष के ठिकानों का पता लगाने में जुटी है।







