गुरुग्राम- गुरुग्राम पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट (दक्षिण) ने सेक्टर-48 में स्थित एक ऑफिस में छिपे बड़े ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। टीम ने देर रात की कार्रवाई में एक कॉल सेंटर पकड़ा, जो “तुरंत लोन मंजूरी” का झांसा देकर लोगों से पैसों की ठगी कर रहा था।
ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने मौके से 13 व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिनमें 11 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 13 मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्ध लोग उमंग फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर अवैध रूप से लैटरहेड और दस्तावेज़ तैयार कर ग्राहकों को भरोसा दिलाते थे।
जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, कानपुर, रायबरेली, बिजनौर, मेरठ और कन्नौज के निवासी शामिल हैं। गिरफ्तार पुरुषों में मेरठ का 31 वर्षीय प्रिंस कुमार कॉल सेंटर का मैनेजर बताया जा रहा है, जबकि हिमांशु पाल (22) वरिष्ठ कॉलर की भूमिका में था।
जांच में खुलासा हुआ कि यह फर्जी संचालन सितंबर 2025 से चल रहा था और पूरे नेटवर्क को मेरठ के सोहेल नाम के व्यक्ति द्वारा नियंत्रित किया जाता था। ऑफिस लगभग 45 हजार रुपये महीने के किराए पर लिया गया था। कर्मचारियों को 15–20 हजार रुपये मासिक वेतन और लक्ष्य पूरा होने पर 10 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था।
भर्ती भी धोखे से की जाती थी — युवाओं को सेल्स एक्जीक्यूटिव की नौकरी का ऑफर देकर जोड़ा जाता था और फिर उनकी पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी KYC तैयार की जाती थी। उसके बाद इन्हीं कर्मचारियों से लोगों को कॉल करवाकर पहले 4,700 रुपये “प्रोसेसिंग शुल्क” और बाद में 18–21 हजार रुपये तक “फाइल चार्ज” के नाम पर वसूले जाते थे।
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (दक्षिण) में मामला दर्ज कर लिया गया है। मुख्य आरोपी प्रिंस और हिमांशु को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जबकि बाकी महिला कर्मचारियों को मामले में शामिल कर आगे की पूछताछ की जा रही है।
पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि लोन, नौकरी या किसी भी सेवा के नाम पर अग्रिम शुल्क मांगने वाले किसी भी कॉल या मेसेज से सतर्क रहें और संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना पुलिस को दें।







