नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की इमिग्रेशन यूनिट ने एक बार फिर अंतर्राज्यीय फर्जी वीजा रैकेट का पर्दाफाश किया है। फ्रांस के लिए नकली ‘डी’ टाइप वीजा बनवाने वाली इस गैंग का नेटवर्क दक्षिण भारत तक फैला हुआ था। ताज़ा कार्रवाई में तमिलनाडु के नमक्कल जिले से एक एजेंट को गिरफ्तार किया गया है। मामला तब खुला जब पेरिस जाने की कोशिश कर रहे तीन भारतीय यात्रियों के पासपोर्ट पर लगे वीजा असली नहीं पाए गए।
कैसे पकड़ में आया फर्जी फ्रेंच ‘डी’ वीजा
28 अक्टूबर को आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर इमिग्रेशन जांच के दौरान तीन यात्री—
नवीनराज सुब्रमण्यम (23)
मोहन गांधी एलंगोवन (38)
प्रभाकरन सेंथिलकुमार (28)
पेरिस जाने की अनुमति मांग रहे थे। जांच के दौरान उनके पासपोर्ट पर लगे फ्रांसीसी ‘डी’ वीजा में सुरक्षा फीचर नहीं पाए गए, जिससे पुष्टि हुई कि वीजा नकली हैं। इसके बाद आईजीआई थाने में भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
पूछताछ में एजेंट का नेटवर्क उजागर
पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ—
नवीनराज को वीजा उसके भाई ने 6 लाख रुपये में दिलवाया था।
जबकि बाकी दो यात्रियों ने नमक्कल के एक एजेंट से 12-12 लाख रुपये में नकली वीजा खरीदा था।
तीनों का उद्देश्य पेरिस में नौकरी पाने के लिए अवैध तरीके से प्रवेश करना था।
मुख्य एजेंट वी. कन्नन गिरफ्त में
स्थानीय सूचना और तकनीकी सर्विलांस की मदद से 55 वर्षीय एजेंट वी. कन्नन को तमिलनाडु से पकड़ा गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया—
वह पैरामाथी में एक सरकारी-संबद्ध आईटीआई चलाता है
वेलूर में “वेट्री ओवरसीज” नाम से विदेश शिक्षा परामर्श फर्म संचालित करता है
अपने साथी की मदद से पेरिस में वेयरहाउस नौकरियों का लालच देकर 16 से अधिक युवाओं को फंसाया
आवेदन लेने और इंटरव्यू के बाद नकली वीजा तैयार किए जाते थे
रकम का लेन-देन बैंक और नकद दोनों तरीकों से होता था
और गिरफ्तारियां संभव, नेटवर्क की कड़ियां खोज रही पुलिस
वी. कन्नन का साथी अभी फरार है। पुलिस उसके ठिकानों पर दबिश दे रही है।
पिछले एक महीने में—
26 फर्जी ट्रैवल मामलों में कार्रवाई
6 धोखाधड़ी करने वाले एजेंट गिरफ्तार
आईजीआई एयरपोर्ट यूनिट ने 28 दलालों को दबोचा, जो यात्रियों को गलत तरीके से विदेश भेजने में शामिल थे।







