रंगदारी से लेकर हत्या तक, तीन दर्जन मामलों में वांछित था आरोपी
जयपुर। राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से जुड़े कुख्यात अपराधी और 6161 गैंग के सरगना प्रदीप गुर्जर को गुरुग्राम की एक लग्जरी सोसायटी से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी प्रदेश में संगठित अपराध पर नकेल कसने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
एडीजी एजीटीएफ दिनेश एम.एन. के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी प्रदीप गुर्जर, निवासी वार्ड नंबर 15 कोटपूतली, लंबे समय से फरार चल रहा था और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के साथी सचिन थापन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह कोटपूतली, बहरोड़, बानसूर, भीलवाड़ा और गुरुग्राम के युवाओं को जोड़कर गैंग को मजबूत कर रहा था।
हाईवे पर दहशत फैलाने वाला 6161 गैंग
एजीटीएफ के अनुसार, यह गैंग मुख्य रूप से हाईवे किनारे स्थित होटलों और ढाबों पर फायरिंग कर भय फैलाता था। इसके बाद गैंग धमकी भरे पत्र भेजकर रंगदारी की मांग करता था। प्रदीप गुर्जर पर रंगदारी, हत्या, हत्या के प्रयास, बैंक लूट, डकैती सहित तीन दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी पर एसपी कोटपूतली द्वारा ₹25,000 का इनाम घोषित था।
150 CCTV फुटेज खंगाले, टीम ने किया सटीक ऑपरेशन
एडीजी के निर्देश पर एएसपी सिद्धांत शर्मा के सुपरविजन में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर राम सिंह ने किया। टीम ने लगातार मुखबिरों को सक्रिय किया और करीब 150 सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुष्टि हुई कि आरोपी गुरुग्राम के खेड़कीदोला क्षेत्र स्थित पॉश सोसायटी एमआर पाम हिल के एक फ्लैट में छिपा है।
गार्ड बनकर की निगरानी
ऑपरेशन के दौरान हेड कांस्टेबल सुधीर कुमार ने सोसायटी में गार्ड के रूप में तैनाती कर अंदर की गतिविधियों पर नज़र रखी। टीम के लिए यह ‘भूसे के ढेर में सुई ढूंढने’ जैसा मुश्किल मिशन था। सटीक लोकेशन की पुष्टि होते ही एजीटीएफ टीम ने फ्लैट पर दबिश देकर प्रदीप गुर्जर को बिना किसी संघर्ष के काबू कर लिया।
पूछताछ जारी, कई खुलासों की उम्मीद
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कोटपूतली लाकर थाना पुलिस के हवाले किया गया है। उससे लगातार पूछताछ हो रही है और माना जा रहा है कि वह कई अन्य मामलों में अहम जानकारी दे सकता है।
इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल महेश सोमरा, हेमंत शर्मा, जितेंद्र कुमार, ड्राइवर दिनेश शर्मा, एसआई बनवारी लाल शर्मा, प्रताप सिंह, महावीर सिंह, देवेंद्र सिंह, गोपाल धाबाई, विजय सिंह और गंगाराम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।







