गुरुग्राम/दिल्ली- गुरुग्राम और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक कुख्यात अपराधी भीम महाबहादुर जोरा को राजधानी के आस्था कुंज पार्क में एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया। नेपाल निवासी यह अपराधी कई गंभीर मामलों में वांछित था और उस पर दो अलग-अलग पुलिस थानों में इनाम घोषित था।
सूचना मिलने पर की गई संयुक्त कार्रवाई
गुरुग्राम के सेक्टर-43 क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि भीम जोरा दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। इनपुट की पुष्टि होते ही क्राइम ब्रांच प्रभारी इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा ने अपनी टीम के साथ दिल्ली पुलिस को साथ लिया और मौके पर पहुंच गए।
जब पुलिस टीम पार्क में पहुंची, तो आरोपी भीम जोरा अपने एक साथी के साथ सीमेंट की बेंच पर बैठा हुआ था। पुलिस को देखते ही उसने खुद को घिरता देख फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई के दौरान पुलिस की गोली से भीम जोरा घायल हो गया।
एम्स में मौत, साथी फरार
घायल अवस्था में उसे तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, उसका एक साथी मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है।
इस मुठभेड़ में भीम जोरा द्वारा चलाई गई गोली इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा के बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, जिससे वे सुरक्षित बच गए। पुलिस ने उसे कई बार आत्मसमर्पण के लिए चेताया था, लेकिन वह लगातार फायरिंग करता रहा।
कई गंभीर मामलों में था वांछित
मृतक आरोपी भीम जोरा, पुत्र महाबहादुर जोरा, नेपाल का मूल निवासी था और भारत में हत्या, डकैती और चोरी जैसी कई संगीन वारदातों में शामिल था।
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हाल ही में उसने 2 अक्टूबर को गुरुग्राम के सेक्टर-49 स्थित ओर्किड पेटल सोसायटी में भाजपा नेता ममता भारद्वाज के घर 20 लाख रुपये की चोरी की थी।
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इस वारदात में उसका साथी युवराज थापा पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
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दिल्ली पुलिस ने भी भीम जोरा पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, क्योंकि वह एक डॉक्टर की हत्या के मामले में वांछित था।
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इसके अलावा, वह गुरुग्राम के सिविल लाइंस क्षेत्र में एक अन्य चोरी के मामले में भी पुलिस को लंबे समय से तलाश था।
क्राइम ब्रांच की लंबे समय से थी निगरानी
गुरुग्राम क्राइम ब्रांच सेक्टर-43 की टीम 2 अक्टूबर की वारदात के बाद से भीम जोरा की लगातार तलाश कर रही थी। सुराग मिलने पर दिल्ली पुलिस के सहयोग से कार्रवाई की गई और एक खतरनाक अपराधी को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया।







