आगरा: सदर क्षेत्र के एक पंजाबी परिवार की दो बहनों को पुलिस ने तीन महीने की कड़ी मशक्कत के बाद कोलकाता से सुरक्षित बरामद कर लिया है। ये दोनों बहनें एक संगठित अवैध धर्मांतरण गिरोह के चंगुल में थीं, जहां उनका नाम बदला जा चुका था और जबरन निकाह कराने की तैयारी चल रही थी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने बड़ी बहन का नाम ‘अमीना’ और छोटी बहन का नाम ‘जोया’ रख दिया था। दोनों को मुस्लिम बहुल बस्ती में छिपाकर रखा गया था। जब पुलिस वहां पहुंची तो स्थानीय विरोध का भी सामना करना पड़ा, लेकिन अंततः टीम दोनों को मुक्त कराने में सफल रही।
ब्रेनवॉश का मामला, दोस्ती बनी बहन की पहचान का जरिया
वर्ष 2020 में एमफिल कर चुकी बड़ी बहन की मुलाकात जम्मू-कश्मीर निवासी साइमा उर्फ खुशबू से हुई, जिसने खुद को रिटायर्ड इंस्पेक्टर की बेटी बताया। साइमा ने दोस्ती का फायदा उठाकर धीरे-धीरे उसे इस्लाम की तरफ मोड़ना शुरू कर दिया। वह धर्म से जुड़ी किताबें मंगाने लगी, नमाज पढ़ने लगी और पूजा-पाठ से दूरी बना ली। विशेषज्ञों की काउंसलिंग और समझाने के बाद भी वह नहीं मानी। धीरे-धीरे उसने अपनी छोटी बहन को भी प्रभावित कर लिया।
24 मार्च को लापता हुईं, सोशल मीडिया से खुला राज
24 मार्च 2025 को दोनों बहनें घर से चार हजार रुपये और कुछ दस्तावेज लेकर दिल्ली के रास्ते कोलकाता पहुंचीं। वहां उन्हें एक व्यक्ति रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम ने मुस्लिम बस्ती में ठहराया। सोशल मीडिया की जांच में पुलिस को बड़ी बहन की एके-47 के साथ प्रोफाइल फोटो मिली, जिससे यह मामला आतंकी एंगल की तरफ भी मुड़ता दिखा।
मोबाइल छोड़कर भागीं, गिरोह करा रहा था निकाह
दोनों बहनें कोई संपर्क न हो इसलिए मोबाइल भी छोड़कर गई थीं। कोलकाता में गिरोह ने पूरी तैयारी कर रखी थी—जबरन निकाह के लिए मुस्लिम लड़कों की तलाश की जा रही थी। पुलिस के अनुसार, यदि निकाह हो जाता तो दोनों को वापस लाना मुश्किल हो जाता।
पुलिस ने फिर से लिखा केस, बरामदगी में लगा समय
पहले यह गुमशुदगी का केस था, जिसे 4 मई को अपहरण में परिवर्तित किया गया। पुलिस ने सोशल मीडिया, डिजिटल ट्रेसिंग और इनपुट्स के जरिये कोलकाता का पता लगाया। तीन महीने से अधिक समय बाद दोनों बहनों को सकुशल वापस लाया गया। परिवार राहत में है लेकिन डरा हुआ और मानसिक तनाव में है।







