नोएडा/सीतापुर- इमलिया सुल्तानपुर में मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी नीलू को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। विशेष पोक्सो कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और साक्ष्यों की मजबूती के आधार पर यह मामला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ की श्रेणी में आता है।
अदालत में पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल का नक्शा, पंचायतनामा, फॉरेंसिक रिपोर्ट, और मृतका की जूती (जो आरोपी के घर से मिली) सहित कुल 16 ठोस साक्ष्यों ने नीलू की भूमिका को पूरी तरह साबित कर दिया। साथ ही 12 गवाहों ने भी कोर्ट में बयान दर्ज कराए, जिनमें विवेचक, चिकित्सक और पीड़िता के परिजन शामिल थे।
कोर्ट ने इससे पहले भी सुनाई है फांसी की सजा:
इससे पहले भी विशेष पोक्सो कोर्ट में कार्यरत रह चुके न्यायाधीश राहुल प्रकाश ने एक पिता को अपनी आठ साल की बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई थी। उस मामले में शव को टैंक में छिपाया गया था।
परिजनों ने जताया संतोष:
फैसले के बाद मृतका के माता-पिता की आंखों में आंसू थे, मगर इस बार पीड़ा के साथ न्याय का संतोष भी था। पीड़िता के पिता, जो पेशे से मजदूर हैं, ने कहा, “हम गरीब हैं, लेकिन कोर्ट ने दिखा दिया कि न्याय सबके लिए बराबर है।”
दोषी का परिवार भी टूटा:
दोषी नीलू के परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। घटना के बाद उसका बड़ा बेटा मानसिक आघात के चलते पढ़ाई छोड़ चुका है। पूरा परिवार समाजिक और भावनात्मक तनाव झेल रहा है।







