नई दिल्ली- पूर्वी दिल्ली के नामी गोयल अस्पताल के नाम पर साइबर अपराधियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा को झांसा देकर ₹9.80 लाख रुपये हड़प लिए। जालसाजों ने खुद को अस्पताल का मालिक बताकर बैंक अधिकारियों को कॉल किया और फर्जी आरटीजीएस अनुरोध भेजकर रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। मामला सामने आने पर अस्पताल प्रबंधन और बैंक अधिकारी दोनों हैरान रह गए।
शाहदरा जिले के साइबर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों — अश्विनी तिवारी (37) और अभिक चंद (36) — को गिरफ्तार किया है। इनके पास से ₹4.30 लाख नकद, 20 ग्राम सोना (एक 10 ग्राम की छड़ और दो 5 ग्राम के सिक्के) बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का एक और साथी शिवम, जो अभिक का साला है, अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
कैसे हुई ठगी
करीब दो महीने पहले किसी अज्ञात व्यक्ति ने खुद को डॉ. अनिल गोयल, मालिक, गोयल अस्पताल एंड यूरोलॉजी सेंटर, कृष्णा नगर के रूप में पेश किया। उसने बैंक ऑफ बड़ौदा की परिचालन प्रमुख आकृति को फोन कर कहा कि वह अस्पताल की ओर से कॉल कर रहा है और इस समय मीटिंग में होने के कारण चेक जारी नहीं कर सकता।
इसके बाद व्हाट्सएप के माध्यम से अस्पताल की फर्जी लेटरहेड पर एक पत्र भेजा गया जिसमें ₹9.80 लाख रुपये आरटीजीएस करने का अनुरोध किया गया। कॉल करने वाले ने यह आश्वासन दिया कि मूल चेक और वाउचर शाम तक भेज दिए जाएंगे। बैंक अधिकारियों ने विश्वास में आकर राशि ट्रांसफर कर दी, जबकि पत्र पर न तो आधिकारिक लोगो था, न ही अधिकृत हस्ताक्षर।
बाद में जब बैंक ने पुष्टि के लिए अस्पताल से संपर्क किया, तो ठगी का खुलासा हुआ। अस्पताल के एमएस विपिन रस्तोगी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर भा.दं.सं. की धारा 318(4)/319(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस जांच और खुलासा
साइबर थाना प्रभारी विजय कुमार के नेतृत्व में एसआई रितु डांगी और एएसआई राहुल चौधरी की टीम ने कई तकनीकी सुरागों के आधार पर जांच शुरू की। जांच में सबसे पहले दीपक उर्फ दीपू नामक व्यक्ति को पकड़ा गया, जिसने आरोपियों को मोबाइल सिम उपलब्ध कराई थी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गाजियाबाद की इंदिरा कॉलोनी से अश्विनी और अभिक को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में सामने आया कि इस ठगी की साजिश तीनों ने मिलकर रची थी।
अश्विनी तिवारी ने अस्पताल को टारगेट चुना और डॉक्टर की फर्जी प्रोफाइल तैयार की।
अभिक चंद ने पुराने मोबाइल फोन खरीदे और संपर्क साधने का काम किया।
शिवम ने अपराध में इस्तेमाल की गई सिम कार्ड की व्यवस्था की।
अश्विनी बीए ग्रेजुएट है जबकि अभिक ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है। दोनों ने साइबर फ्रॉड से पैसा कमाने की योजना बनाई थी।
अभी जारी है जांच
पुलिस का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों की जांच की जा रही है और बाकी ठगी की राशि बरामद करने के प्रयास जारी हैं। फरार आरोपी शिवम की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह पहले भी इसी तरह के साइबर फ्रॉड की घटनाओं में शामिल रहा हो सकता है।







