कोटेदार, कंप्यूटर ऑपरेटर और पूर्ति विभाग के अधिकारियों की साजिश से हुआ करोड़ों का नुकसान
बरेली। बरेली जिले में वर्षों पहले हुए खाद्यान्न घोटाले की जांच ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। सीआईडी द्वारा की जा रही छानबीन में खुलासा हुआ है कि कैसे गरीबों के नाम पर बड़े पैमाने पर राशन की लूट की गई और सरकारी तंत्र की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय तक चलता रहा।
वर्ष 2015 से 2018 के बीच सामने आए इस मामले में सबसे गंभीर अनियमितताएं सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों—सीबीगंज, कोतवाली, प्रेमनगर और बारादरी—में देखी गईं। यहां एक ही राशन कार्ड पर दर्जनों अपात्र व्यक्तियों को राशन दिए जाने की एंट्री की गई। जांच में सामने आया है कि एक आधार नंबर से 65 से लेकर 90 तक फर्जी लाभार्थियों को जोड़कर सरकारी अनाज का दुरुपयोग किया गया।
उस समय पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों के जरिए लाभार्थियों का सत्यापन और आधार फीडिंग की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कोटेदारों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस प्रक्रिया को ही हथियार बना लिया गया। अतिरिक्त राशन कागजों में बंटता रहा और हकीकत में वह ब्लैक मार्केट में बेच दिया गया।
जिले में घोटाले की शुरुआती जांच के दौरान नौ कोटेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन कार्यवाही की रफ्तार धीमी रही। जब लंबे समय तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला तो वर्ष 2024 में यह मामला सीआईडी को सौंपा गया। एजेंसी ने बीते कुछ महीनों में जांच को आगे बढ़ाते हुए कई अहम खुलासे किए हैं।
राशन घोटाले के केंद्र में वही दौर है जब जिले में पूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तैनात थे। जांच के घेरे में 2013 से 2021 के बीच पद पर रहे अधिकारी भी हैं। विभाग के मौजूदा कर्मचारी इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं और यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि यह सब कुछ उनके कार्यकाल से पहले हुआ। सीआईडी अब इस पूरे मामले की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई संभव है।







