नई दिल्ली। अदालत ने 10 वर्षीय लड़की के यौन उत्पीड़न के दोषी 35 वर्षीय एक स्कूल वैन चालक अनुज को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि समाज के भीतर अन्य समान विचारधारा वाले व्यक्तियों को हतोत्साहित करने के लिए ऐसी सजा आवश्यक है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील बाला डागर ने कहा, दोषी के प्रति नरमी बरतने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने आदेश में कहा कि अपराध की गंभीरता, पीड़ित बच्ची और दोषी की उम्र, दोषी और पीड़ित बच्चे की पारिवारिक परिस्थितियों सहित, गंभीर और कम करने वाले कारकों को ध्यान में रखते हुए और सामाजिक और आर्थिक कारक उन्हें प्रभावित कर रहे हैं।
अदालत ने दोषी के कार्यों को उसके लिए खुशी का विकृत रूप बताया, लेकिन पीड़ित के लिए एक दर्दनाक परीक्षा थी, जो घटना के समय वैन में दोषी के साथ अकेली थी। इसमें बच्चे की शारीरिक निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने वाले ऐसे जघन्य कृत्यों में शामिल दुर्व्यवहार करने वालों की आलोचना की और कहा कि उनके कार्य उन स्थानों की पवित्रता का उल्लंघन करते हैं जहां बच्चों को उल्लंघन से सुरक्षित महसूस करना चाहिए। अदालत ने कहा कि पीड़िता को गंभीर यौन उत्पीड़न और मानसिक और शारीरिक आघात के साथ-साथ अपने और अपने परिवार के सदस्यों के अपमान का सामना करना पड़ा। अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।







