देहरादून। साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर 70 वर्षीय महिला से करोड़ों रुपये ठग लिए। पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि ठगों ने खुद को केंद्रीय एजेंसी और पुलिस अधिकारी बताकर दो माह तक मानसिक दबाव बनाया और अंततः उससे कुल 3.09 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
शिकायत के अनुसार एक सितंबर 2025 को महिला को कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया, जबकि दूसरे व्यक्ति ने अपने आपको आईपीएस अधिकारी बताकर बातचीत की। आरोप है कि उन्होंने महिला को डराया कि उसका मोबाइल नंबर कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है और भारी रकम का अवैध लेन-देन उसके खाते से हुआ है। गिरफ्तारी और परिवार के खिलाफ कार्रवाई की धमकी देकर उसे पूरी तरह दहशत में रखा गया।
ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पुलिस जैसी वर्दी और कार्यालय का माहौल दिखाकर भरोसा पैदा किया। महिला को निर्देश दिए गए कि वह किसी से संपर्क न करे, हर घंटे अपनी लोकेशन साझा करे और चैट को गोपनीय रखे। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजकर आश्वस्त किया गया कि “जांच पूरी होने पर” रकम वापस कर दी जाएगी।
डर के माहौल में महिला ने अपनी एफडी तुड़वाई, शेयर बेचे और गहने गिरवी रखकर अलग-अलग किस्तों में रकम ट्रांसफर की। पहली बड़ी रकम सितंबर में भेजी गई और यह सिलसिला अक्टूबर के अंत तक चलता रहा। अंतिम ट्रांजैक्शन में उसने दो करोड़ से अधिक रुपये भेजे। कुल मिलाकर 3 करोड़ 9 लाख रुपये साइबर ठगों के खातों में चले गए।
मामला साइबर थाने में दर्ज कर लिया गया है। अजय सिंह (एसएसपी, एसटीएफ) ने बताया कि संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, आईपी लॉग और बैंक खातों की जांच की जा रही है। संबंधित खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी कॉल पर खुद को सीबीआई, पुलिस या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर डराने-धमकाने वालों पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या लेन-देन की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।







