सरकारी कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत, नाम सामने आने के बावजूद अब तक बचे हुए हैं
बरेली। करोड़ों की ठगी कर चर्चा में आए श्री गंगा इंफ्रासिटी के निदेशक राजेश मौर्य को कानून ने भले ही जेल के पीछे पहुंचा दिया हो, लेकिन उसकी ठगी के शिकार लोगों को अब भी इंसाफ की उम्मीद है। जमीन और मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों से अरबों का निवेश करवाने वाले इस गिरोह ने परिवार सहित एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया था, जिसमें कुछ सरकारी और बैंक कर्मियों की संलिप्तता भी सामने आई थी।
राजेश मौर्य, जो बारादरी के चंद्रगुप्तपुरम का निवासी है, ने वर्ष 2018 में अपने भाई मनोज मौर्य के साथ मिलकर श्री गंगा इंफ्रासिटी नामक फर्जी रियल एस्टेट कंपनी खड़ी की थी। इसमें उन्होंने अपने अन्य दो भाइयों अजय और दिनेश मौर्य, तथा पिता रामदेव मौर्य को भी शामिल कर लिया। इस ठगी के खेल में तीन और सगे भाई—शिवनाथ, कृष्णनाथ और विश्वनाथ मौर्य—एजेंट की भूमिका में सामने आए। इस पूरे नेटवर्क ने मिलकर बरेली और आसपास के हजारों लोगों को भूखंड और ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर फंसा लिया।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में एक बैंक अधिकारी और एक निर्माण विभाग के इंजीनियर की भी भूमिका रही, जिन्होंने अपने संबंधों का फायदा उठाते हुए राजेश की कंपनी में अपने परिजनों के नाम से काली कमाई लगा दी। हालांकि जब पुलिस ने शिकंजा कसा, तो ये साझेदार समय रहते खुद को अलग करने में कामयाब रहे।
गिरफ्तारी के वक्त निवेशकों को उम्मीद थी कि उनकी गाढ़ी कमाई शायद वापस मिल सकेगी, लेकिन राजेश के पास से सिर्फ 1.96 लाख रुपये की बरामदगी हुई। पुलिस ने उसके 21 बैंक खातों को सीज करते हुए करीब दस लाख की राशि फ्रीज़ की और आठ महंगी गाड़ियां जब्त कीं, लेकिन तीन सौ करोड़ के घोटाले के मुकाबले यह रकम नाकाफी साबित हुई।
पूछताछ में राजेश ने आरोप लगाया था कि उसके ही कुछ साझीदारों ने कंपनी को लूट कर उसे संकट में डाला है। उसने सहयोग की शर्त पर निवेशकों का पैसा लौटाने का वादा भी किया था, मगर जनता ने उसकी बातों पर फिर से विश्वास करने से इनकार कर दिया।
आज भी सैकड़ों निवेशक राजेश मौर्य और उसके साथियों के खिलाफ न्यायालय में केस लड़ रहे हैं, चेक बाउंस के मुकदमे और कानूनी लड़ाई उनकी उम्मीदों का आखिरी सहारा बने हुए हैं। हालांकि, यह साफ है कि गिरोह की गिरफ्तारी के बावजूद निवेशकों के लिए राहत की राह अब भी लंबी और अनिश्चित है।







