बिजनौर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रकाश चंद शुक्ला ने दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या में दोषी पाते हुए मृतका के पति प्रवेश कुमार, सास नीलम व ननद पीयूष को सात-सात साल के कारावास एवं सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता मुकेश चौहान के अनुसार, जिला सुल्तानपुर निवासी रमेश चंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री शिल्पी उर्फ हिमानी की शादी प्रवेश कुमार निवासी जयनगर कॉलोनी नजीबाबाद से 19 अप्रैल 2007 को की थी। शादी में पांच लाख रुपये नगद व दो लाख रुपये के जेवर दिए गए थे।
प्रवेश की बहन पीयूष का अपने पति से तलाक का विवाद चल रहा था। वह लखनऊ में नर्सिंग का कोर्स कर रही थी। और अक्सर नजीबाबाद आती रहती थी। शादी के बाद से ही प्रवेश, उसकी मां नीलम व बहन पीयूष कम दहेज लाने के लेकर उसकी लड़की को प्रताड़ित करते थे और 10 लाख की मांग करते थे। कहते थे 10 लाख रुपये और नहीं दिए तो लड़की को जान से मार देंगे। वह उसकी लड़की को कभी उसके पास भी अपने मायके नहीं भेजते थे। प्रवेश रेलवे में टीटीई की नौकरी करता था। दो नवंबर 2007 को प्रवेश के पड़ोसी का फोन आया कि शिल्पी की हालत खराब है।
इस पर वह लोग मेरठ गए। लड़की को दिल्ली ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि उसके पति प्रवेश कुमार, सास नीलम, ननद पीयूष का उनकी लड़की शिल्पी की दहेज हत्या में हाथ है। उनकी लड़की को जहर देकर मारा गया। कोर्ट ने इस मामले में प्रवेश कुमार, सास नीलम व ननद पीयूष को सजा सुनाई।







